सर्वसिद्धी रत्न, रूद्राक्ष एंड स्प्रिचुअल प्रोडक्ट-

रत्नों के माध्यम से व्यक्ति, संबंधित ग्रह की ऊर्जा को अपनी ओर आकर्षित कर उसके शुभ प्रभावों को बढा सकता है! रत्न दरअसल एक प्रकार की कलर थैरेपी होती है!अब सवाल यह उठता है कि हमें किस ग्रह का रत्न पहनना चाहिए! आजकल हम देखते हैं ज्यादातर लोग रत्नों का गलत कांबिनेशन पहने हुए होते हैं! कभी-कभी तो वे उस ग्रह का भी रत्न तक धारण किए हुए होते हैं जो उनके लिये कतई शुभ नहीं हैं, हालांकि ऐसे रत्नों के परिणाम उनके सामने तत्काल नहीं आते, मगर दूरगामी परिणामों के शुभ होने की परिकल्पना नहीं की जा सकती!

व्यक्ति को अपनी जन्मकुंडली के आधार पर कौन सा रत्न पहनना चाहिए तथा कितने केरेट का पहनना चाहिए इसकी जानकारी हमारे द्वारा दी जाती है! रत्नों थैरेपी को लेकर सर्वसिद्धी संस्थान ने एडवांस रिसर्च की है, जो हमारे क्लाइंटस के लिए काफी उपयोगी सिद्ध हो रही है! सर्वसिद्धी संस्थान आपके बजट के अनुसार, प्रमाणिकता के सर्टिफिकेट सहित अभिमंत्रित रत्न आपको उपलब्ध करवाता है! यहां आपको बताते चले कि रत्न जब तक साधारण-सा पत्थर का टुकडा मात्र है, जब तक उसे संबंधित ग्रहों के मंत्रों द्वारा विधिविधान से अभिमंत्रित नहीं किया गया हो!

 

 

रत्न सेक्शन-

पुखराज-

यह गुरू ग्रह का रत्न कहलाता है! जिसे पहनने से व्यक्ति को गुरू ग्रह संबंधी शुभ प्रभाव प्राप्त होते हैं! आत्मविश्वास, धन एवं मानसम्मान प्राप्त होता है! वैवाहिक जीवन मधुर बनता है साथ ही कारोबार फलता है!

 

पन्ना-

यह बुध ग्रह का रत्न कहलाता है! जिसे पहनने से व्यक्ति को बुध ग्रह संबंधी शुभ प्रभाव प्राप्त होते हैं! बुद्धि एवं एकाग्रता का विकास होता है! सम्पन्नता आती है!

 

नीलम-

यह शनि ग्रह का रत्न कहलाता है! जिसे पहनने से व्यक्ति को शनि ग्रह संबंधी शुभ प्रभाव प्राप्त होते हैं! रोजगार तथा नौकरी में पदोन्नति प्राप्त होती है! साथ ही, समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त होती है!

 

माणिक्य-

यह सूर्य ग्रह का रत्न कहलाता है! जिसे पहनने से व्यक्ति को सूर्य ग्रह संबंधी शुभ प्रभाव प्राप्त होते हैं! माणिक्य बेहतर स्वास्थ्य, मानसम्मान, संतानप्राप्ति दिलाने में सहायक होता है!

 

मोती अथवा चंद्रमणी-

यह चंद्र ग्रह का रत्न कहलाता है! जिसे पहनने से व्यक्ति को चंद्र ग्रह संबंधी शुभ प्रभाव प्राप्त होते हैं! मानसिक रूप से व्यक्ति अधिक प्रसन्न होता है!

 

मूंगा-

यह मंगल ग्रह का रत्न कहलाता है! जिसे पहनने से व्यक्ति को मंगल ग्रह संबंधी शुभ प्रभाव प्राप्त होते हैं! मूंगा के प्रभाव से साहस एवं आत्मविश्वास बढता है!

 

ओपल-

यह शुक्र ग्रह का रत्न कहलाता है! जिसे पहनने से व्यक्ति को शुक्र ग्रह संबंधी शुभ प्रभाव प्राप्त होते हैं! आकर्षण, वाणी में प्रभाव तथा अर्थ में वृद्धि में सहायक होता है!

 

गोमेद-

यह राहू ग्रह का रत्न कहलाता है! जिसे पहनने से व्यक्ति को राहू ग्रह संबंधी शुभ प्रभाव प्राप्त होते हैं! गोमेद तनाव दूर करता है, तार्किक बुद्धि का विकास कर प्रभाव भी बढाता है!

 

लहसुनिया-

यह केतु ग्रह का रत्न कहलाता है! जिसे पहनने से व्यक्ति को केतू ग्रह संबंधी शुभ प्रभाव प्राप्त होते हैं! धर्म कार्यों में रूचि एवं आत्मविश्वास बढता है! साथ ही, ऊपरी बाधा से रक्षा करता है!

 

रूद्राक्ष सेक्शन-

रूद्राक्ष की उत्पत्ति रूद्र के अक्ष अर्थात आंसू से हुई थी! अतः यह रूद्राक्ष कहलाया! रूद्राक्ष एक तरह का फल है! जो नेपाल में पाया जाता है! इसके अलावा यह इंडोनेशिया से भी आता है! रूद्राक्ष पर बनी धारी (लाइन) रूद्राक्ष का मुख कहलाता है! यानी एक धारी होने से एकमुखी रूद्राक्ष कहलायेगा और इसी प्रकार दस धारी होने से दसमुखी रूद्राक्ष कहलायेगा!
हमारे अध्ययनों में है कि प्राकृतिक रूप से उत्पन्न रूद्राक्ष चाहे वह कितने भी मुखी हो, शिवजी की भक्ति एवं कृपा दिलाने वाला, सकारत्मकता तथा रोगों से रक्षा करने में सहायक होता है! अलग-अलग प्रकार की धारियों को अलग-अलग ग्रह एवं देवी-देवताओं से जोडकर भी देखा जाता है! गणेश रूद्राश एवं गौरी शंकर रूद्राक्ष की भी अपनी महिमा है! जिसकी जानकारी नीचे दी गई है!

एकमुखी रूद्राक्ष-

एकमुखी रूद्राक्ष में प्राकृतिक रूप से एक धारी होती है! ग्रहों में इसे सूर्य ग्रह से जोडकर देखा जाता है! एकमुखी रूद्राक्ष जातक को सूर्य संबंधी कष्ट का निवारण तथा सूर्य के शुभ परिणाम देता है! प्रशासनिक क्षेत्र में कार्यरत लोगों को इसे धारण करना चाहिए! जो व्यक्ति शिवजी को अपना ईष्टदेव मानते हैं, उन्हें भी इसे पहना चाहिए क्योंकि एकमुखी रूद्राक्ष को साक्षात शिवस्वरूप समझा जाता है! इसे धारण करने से व्यक्ति को परमशांति एवं संतोष प्राप्त होने लगता है तथा भक्ति-उपासना में मन लगता है!

 

दोमुखी रूद्राक्ष-

दोमुखी रूद्राक्ष में प्राकृतिक रूप से दो धारियां होती है! ग्रहों में इसे चंद्र ग्रह से जोडकर देखा जाता है! इसे धारण करने से व्यक्ति कोे चंद्र ग्रह की शुभता प्राप्त होती है तथा चंद्रजनित कष्ट जैसे टेंशन, अशांति का निवारण करता है! जिनकी जन्मपत्रिका में चंद्रमा क्रूर ग्रहों से पीडित है, खराब भावों में स्थित है अथवा नीच का है, उन्हें यह अवश्य धारण करना चाहिए! इसके साथ ही जो दवा, दूध, मिनरल वॉटर, आभूषण व्यवसायियों को तथा कंप्यूटर, ऐनिमेशन, चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत लोगों को भी इसे धारण करना चाहिए! ऐसा माना जाता है इसमें उपस्थित दो धारियां क्रमशः शिव एवं देवी पावर्ती के प्रतीक होते है!

 

तीनमुखी रूद्राक्ष-

तीनमुखी रूद्राक्ष में प्राकृतिक रूप से तीन धारियां होती है! ग्रहों में इसे मंगल ग्रह से जोडकर देखा जाता है! इसे धारण करने से व्यक्ति कोे मंगल ग्रह की शुभता प्राप्त होती है तथा मंगल संबंधी कष्टों का निवारण होता है! तीनमुखी रूद्राश अग्निदेव का प्रतिनिधित्व करता है! अग्निदेव के प्रभाव से गतजन्मों के पापों का शमन होता है! आलस्य को दूर करने में भी यह मदद करता है!

 

चारमुखी रूद्राक्ष

चारमुखी रूद्राक्ष में प्राकृतिक रूप से चार धारियां होती है! ग्रहों में इसे बुध ग्रह से जोडकर देखा जाता है! इसे धारण करने से व्यक्ति कोे बुध ग्रह की शुभता प्राप्त होती है तथा बुध संबंधी कष्टों का निवारण होता है! चारमुखी रूद्राक्ष ब्रहमदेव का प्रतिनिधित्व करता है! इसके धारण करने से व्यक्ति में ज्ञान, कल्पनाशक्ति एवं प्रभावी वाणी का विकास होता है! स्टूडेंटस के लिए यह याददाश्त एवं एकाग्रता बढाने में मदद करता है!

 

पांचमुखी रूद्राक्ष

पांचमुखी रूद्राक्ष
पांचमुखी रूद्राक्ष में प्राकृतिक रूप से पांच धारियां होती है! ग्रहों में इसे गुरू ग्रह से जोडकर देखा जाता है! इसे धारण करने से व्यक्ति कोे गुरू ग्रह की शुभता प्राप्त होती है तथा गुरू संबंधी कष्टों का निवारण होता है! पांचमुखी रूद्राक्ष रूद्राग्नि देव (रुद्र के रूप) का प्रतिनिधित्व करता है! इसे धारण करने से व्यक्ति के द्वारा वर्तमान जीवन में किए गए पापों का नाश होता है!ध्यान-साधना में मदद करता है! बेहतर जीवन का मार्ग प्रशस्त होता है! नाम-यश बढाता है!

 

छःमुखी रूद्राक्ष

छःमुखी रूद्राक्ष में प्राकृतिक रूप से 6 धारियां होती है! ग्रहों में इसे शुरू ग्रह से जोडकर देखा जाता है! इसे धारण करने से व्यक्ति कोे शुक्र ग्रह की शुभता प्राप्त होती है तथा शुक्र संबंधी कष्टों का निवारण होता है! यह रूद्राक्ष व्यक्ति में आकर्षण एवं वाणी का प्रभाव बढाता है! छः मुखी रूद्राक्ष शिव-शक्ति के पुत्र कार्तिकेय का प्रतिनिधित्व करता है! कार्तिकेय चूंकि देवसेना के सेनापति हैं अतः छः मुखी रूद्राक्ष व्यक्ति को पराक्रम एवं साहस भी देता है!

 

सातमुखी रूद्राक्ष

सातमुखी रूद्राक्ष में प्राकृतिक रूप से 7 धारियां होती है! ग्रहों में इसे शनि ग्रह से जोडकर देखा जाता है! इसे धारण करने से व्यक्ति कोे शनि ग्रह की शुभता प्राप्त होती है तथा शनि संबंधी कष्टों का निवारण होता है! शनिग्रह की ढईया अथवा साढेसाती में इसे पहनना शनि के बुरे प्रभावों में कमी लाता है! इसे पहनने से व्यक्ति को महालक्ष्मीजी की कृपा भी प्राप्त होती है! फसे हुए पैसे वापस प्राप्त करने में भी यह सहायक होता है!

 

आठमुखी रूद्राक्ष

आठमुखी रूद्राक्ष में प्राकृतिक रूप से 8 धारियां होती है! ग्रहों में इसे राहू ग्रह से जोडकर देखा जाता है! इसे धारण करने से व्यक्ति कोे राहू ग्रह की शुभता प्राप्त होती है तथा राहू संबंधी कष्टों का निवारण होता है! यह रूद्राक्ष श्री गणेशजी का प्रतिनिधित्व करता है! अतः जीवन के सभी दुखों एवं बाधाओं को दूर करने में सहायक होता है! साथ ही मानसिक शांति प्राप्त होती है!

 

नौमुखी रूद्राक्ष

नौमुखी रूद्राक्ष में प्राकृतिक रूप से 9 धारियां होती है! ग्रहों में इसे केतु ग्रह से जोडकर देखा जाता है! इसे धारण करने से व्यक्ति कोे केतु ग्रह की शुभता प्राप्त होती है तथा केतु संबंधी कष्टों का निवारण होता है! नौमुखी रूद्राक्ष नवदुर्गा का प्रतिनिधित्व करता है! अतः इसे धारण करने से व्यक्ति की दुर्गति नहीं होती! नवदुर्गा के साथ व्यक्ति को भैरव एवं हनुमानजी की भी कृपा मिलती है!

 

दसमुखी रूद्राक्ष

दसमुखी रूद्राक्ष दस महाविद्या सहित दसों दिशाओं का प्रतिनिधित्व करता है! इसके अलावा दसमुखी रूद्राक्ष को श्रीविष्णु से जोडकर भी देखा जाता है! यह रूद्राक्ष विभिन्न प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा जैसे नजरदोष, ऊपरी बाधा, कालाजादू इत्यादि से रक्षा करता है!

 

ग्यारहमुखी रूद्राक्ष

ग्यारहमुखी रूद्राक्ष को भगवान शिव के ग्यारहवें अवतार हनुमानजी से जोडकर देखा जाता है! साहसिक फील्ड एवं जोखिमपूर्ण केरियर वालों को इसे धारण करना चाहिए! हनुमानजी की शक्ति निहित होने के कारण यह व्यक्ति का साहस बढाता है तथा सभी प्रकार से रक्षा करता है!

 

बारहमुखी रूद्राक्ष

बारहमुखी रूद्राक्ष द्वादश आदित्यों का प्रतिनिधित्व करता है! शास्त्रों में द्वादश यानी बारह प्रकार के सूर्यदेवों का वर्णन मिलता है! इस रूद्राक्ष के धारण करने से व्यक्ति में प्रशासनिक क्षमता बढती है! साथ ही व्यक्ति को तेज, शक्ति एवं नामना की प्राप्ति होती है! राजनेता, प्रशासनिक सेवा, एचआर-एडमिन क्षेत्र के लोगों को पहनना शुभ रहता है!

 

तेरहमुखी रूद्राक्ष

तेरहमुखी रूद्राक्ष को कामदेव एवं इंद्र का प्रतिनिधित्व प्राप्त है! इसे धारण करने से आकर्षण शक्ति का विकास, उच्चपद की प्राप्ति तथा जीवन के विभिन्न ऐश्वर्य एवं सुख की प्राप्ति के मार्ग प्रशस्त होते हैं! कला वर्ग से जुडे जातक को धारण करना चाहिए!

 

चौदहमुखी रूद्राक्ष

चौदहमुखी रूद्राक्ष को शिवजी की तीसरे नेत्र का स्वरूप माना गया है! शिवजी का तीसरा नेत्र आज्ञा चक्र यानी दोनों भौंहो के मध्य पाया जाता है अतः इसके धारण करने से आज्ञाचक्र शुद्ध होता है जिसके कारण परिवार एवं समाज में व्यक्ति की बात मानी जाती है! व्यक्ति को भविष्य में होने वाली चीजों के संकेत भी प्राप्त हो सकते हैं! इसके साथ ही, यह नकारात्मक ऊर्जा एवं शत्रुओं से भी रक्षा करता है!

 

गणेश रूद्राक्ष

रूद्राक्ष में प्राकृतिक रूप से छोटी-सी सूंडनुमा आकृति होने के कारण यह गणेश रूद्राक्ष कहलाया! विध्नों के नाश, शिक्षा में मन एवं एकाग्रता एवं शांति का प्रदाता है यह रूदाक्ष!

 

गौरीशंकर रूद्राक्ष

राकृतिक रूप से दो रूद्राक्ष लगभग समान आकार के जुडे हुए हों, तो वे गौरीशंकर रूद्राक्ष कहलाये जाते हैं! जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है यह गौरीशंकर अर्थात शिव-शक्ति स्वरूपा माना जाता है! इसके धारण करने से पति-पत्नि एवं परिवार के मध्य प्रेम बढता है! अविवाहित व्यक्तियों को यह श्रेष्ठ वर-वधु दिलवाने में सहायक होता है!

 

श्वेतआर्क गणेश-

श्वेेतआर्क गणेश दरअसल आर्क के पेड की जड में पाई जाने वाली गणेशजी की आकृति है! गणेशजी के नामों से अभिमंत्रित हो जाने के बाद यह प्रभावी हो जाती है! इसे पूजन स्थान पर रखकर सुबह-शाम पूजन से गणेशजी की कृपा प्राप्त होती है! विध्नों का विनाश होता है, पढाई में मन लगता है!

 

दक्षिणावर्ति शंख-

दक्षिणावर्ति शंख को साक्षात लक्ष्मी स्वरूपा कहा गया है! घर अथवा कार्यस्थल पर इसकी स्थापना एवं पूजन से श्री में वृद्धि होती है! ऐसी मान्यता है कि प्रातः उठते साथ ही दक्षिणावर्ति शंख के दर्शन एवं प्रणाम करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं!

 

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